देहरादून। पर्वाधिराज पर्युषण दशलक्षण महापर्व के पावन अवसर पर आध्यात्मिक श्रमणी परम पूज्य वात्सल्यमयी आर्यिका रत्न श्री 105 पूर्णमति माताजी ससंघ के पावन सान्निध्य में देहरादून के गांधी रोड स्थित श्री दिगम्बर जैन पंचायती मंदिर सहित शहर के विभिन्न जैन मंदिरों में दशलक्षण महापर्व भव्य एवं धार्मिक वातावरण में मनाया जा रहा है। प्रातःकाल मंदिरों में घंटियों की मधुर गूंज के बीच श्रीजी का प्रक्षाल, नित्य नियम पूजन एवं दशलक्षण पूजन सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। इसके साथ ही आयोजित भव्य आत्मबोध संस्कार शिविर में देहरादून के साथ-साथ विभिन्न स्थानों से आए श्रद्धालु बढ़-चढ़कर सहभागिता कर रहे हैं।
इस अवसर पर पूज्य आर्यिका पूर्णमति माताजी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि आर्जव धर्म का अर्थ है मन, वचन और कर्म में सरलता, सीधापन और ईमानदारी रखना, तथा छल-कपट व मायाचारी का त्याग करना।उत्तम आर्जव धर्म का सारत्रिरूपता में एकता है जैसा मन में हो, वैसा ही वचन से बोलें और वैसा ही कर्म (तन) से करें।कपट का त्याग करें कुटिलता और मायाचारी व्यक्ति को भीतर से बेचैन रखती है, जबकि सरलता मोक्ष का सीधा मार्ग है। आत्माश्रित भाव यह शरीर पर नहीं बल्कि आत्मा के निर्मल भावों पर आधारित है। 18 सितंबर को उत्तम आर्जव धर्म के अवसर पर दोपहर में वर्णी जैन स्कूल द्वारा मंगलाचरण प्रस्तुत किया गया।
इसके पश्चात जैन वर्णी जैन स्कूल द्वारा गांधी रोड स्थित जैन भवन में रात्रि 8.30 बजे प्रेरणादायक नाटिका का मंचन किया गया। आत्मबोध संस्कार शिविर के अंतर्गत आचार्य भक्ति, सामायिक, शंका समाधान, प्रतिक्रमण, जैन धर्म पर मार्मिक प्रवचन, तत्त्वार्थ सूत्र का अध्ययन, महाआरती, दस धर्मों पर प्रवचन, ‘द आर्ट ऑफ सेल्फ-डिस्कवरी’ ध्यान शिविर तथा प्रश्न मंच सहित विभिन्न आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। ध्यान शिविर में बा.ब्र. ऋतु दीदीजी ने श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन एवं आत्म-अन्वेषण के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम की जानकारी देते हुए मीडिया कोऑर्डिनेटर मधु जैन ने बताया कि दशलक्षण महापर्व के दौरान प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि 19 सितम्बर को दोपहर 2रू00 बजे विद्या सिंधु बालिका द्वारा मंगलाचरण और शाम को 8.30 बजे धार्मिक अंताक्षरी (जैन वीरांगना मंच, दिगंबर जैन महासमिति ,जैन मिलन शिवालिक) द्वारा आयोजित की जाएगी। उन्होंने बताया कि दशलक्षण महापर्व के दौरान पूज्य माताजी के सान्निध्य में प्रतिदिन धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें देहरादून के साथ-साथ बाहर से आए श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में शामिल होकर धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं। इस अवसर पर जैन समाज, श्री विद्या-समय-पूर्ण वर्षायोग समिति, जैन भवन कार्यकारिणी सहित विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी, सदस्यगण एवं बड़ी संख्या में बाहर से आए श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी श्रद्धालुओं ने पूज्य माताजी के पावन सान्निध्य में धर्मलाभ प्राप्त किया।
दशलक्षण महापर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म की आराधना, आत्मबोध संस्कार शिविर में श्रद्धालुओं ने उठाया धर्मलाभ
देहरादून। पर्वाधिराज पर्युषण दशलक्षण महापर्व के पावन अवसर पर आध्यात्मिक श्रमणी परम पूज्य वात्सल्यमयी आर्यिका रत्न श्री 105 पूर्णमति माताजी ससंघ के पावन सान्निध्य में देहरादून के गांधी रोड स्थित श्री दिगम्बर जैन पंचायती मंदिर सहित शहर के विभिन्न जैन मंदिरों में दशलक्षण महापर्व भव्य एवं धार्मिक वातावरण में मनाया जा रहा है। प्रातःकाल मंदिरों में घंटियों की मधुर गूंज के बीच श्रीजी का प्रक्षाल, नित्य नियम पूजन एवं दशलक्षण पूजन सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। इसके साथ ही आयोजित भव्य आत्मबोध संस्कार शिविर में देहरादून के साथ-साथ विभिन्न स्थानों से आए श्रद्धालु बढ़-चढ़कर सहभागिता कर रहे हैं।
इस अवसर पर पूज्य आर्यिका पूर्णमति माताजी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि आर्जव धर्म का अर्थ है मन, वचन और कर्म में सरलता, सीधापन और ईमानदारी रखना, तथा छल-कपट व मायाचारी का त्याग करना।उत्तम आर्जव धर्म का सारत्रिरूपता में एकता है जैसा मन में हो, वैसा ही वचन से बोलें और वैसा ही कर्म (तन) से करें।कपट का त्याग करें कुटिलता और मायाचारी व्यक्ति को भीतर से बेचैन रखती है, जबकि सरलता मोक्ष का सीधा मार्ग है।आत्माश्रित भाव यह शरीर पर नहीं बल्कि आत्मा के निर्मल भावों पर आधारित है।