देहरादून। भाजपा ने कांग्रेस के एसआईआर विरोध के नाम कर अलोकतांत्रिक राजनीति करने और अराजकता फैलाने की कोशिश का आरोप लगाया है। प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने इसे संवैधानिक प्रक्रिया पर प्रहार बताते हुए प्रश्न किया कि क्या दिवंगत और फर्जी लोगों को वोटर बनाने की कांग्रेसी मंशा देशद्रोह जैसी नही है? ज्ञानेश कुमार के चुनाव आयुक्त बनने से पहले ही कांग्रेस लोकसभा चुनाव हार गई थी, फिर भी उन्हें गड़बड़ लगती है तो क्या केरल, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और स्वयं राहुल प्रियंका खड़गे सबका चयन फर्जी है?
पार्टी मुख्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कांग्रेस द्वारा एसआईआर प्रक्रिया के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस की नीयत पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस की बौखलाहट साबित करती है कि वह लोकतंत्र की शुचिता और पारदर्शी मतदाता सूची के खिलाफ खड़ी है। कांग्रेस से सीधे और तल्ख सवाल पूछते हुए जवाब मांगा कि क्या दिवंगत लोगों को वोटर बनाए रखना चाहती है कांग्रेस? जो लोग इस दुनिया में नहीं हैं या जो सत्यापन के दौरान अपने स्थानों पर नहीं मिले, उन्हें मतदाता सूची में कैसे जोड़ा रख सकते हैं? वहीं पूछा कि डुप्लीकेट और शिफ्टेड वोटरों पर कांग्रेस को आपत्ति क्यों? जो लोग अन्य स्थानों पर शिफ्ट हो चुके हैं, उनके डबल वोट क्यों बनने चाहिए? मतदाता सूची से डुप्लीकेट नाम काटना एक संवैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रिया है, कांग्रेस इसका विरोध क्यों कर रही है?
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई बिना किसी वैध दस्तावेज के फर्जी वोटर बनाना चाहता है, तो यह देशद्रोह जैसा गंभीर कृत्य है। साथ ही कांग्रेस पर परोक्ष रूप से आरोप लगाया कि कहावत है ष्चोरों को सब चोर ही नजर आते हैं।ष् हो सकता है कांग्रेस को अपने पुराने दौर की चुनावी धांधलियों और धांधली के अनुभवों का अभ्यास है। उनका इतिहास भी चुनाव आयुक्तों को मंत्री सांसद और पार्टी पदाधिकारी बनाने के रिकॉर्ड से भरा पड़ा है। इसीलिए उन्हें अपने प्रयासों, क्षमता और नीयत में कमी नहीं नजर आती है बल्कि पूरे सिस्टम को ही वे भ्रष्ट साबित करने पर तुले हैं।इसी तरह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर कांग्रेस द्वारा लगाए जा रहे आरोपों को हास्यास्पद और अज्ञानतापूर्ण बताते हुए श्री भट्ट ने कहा कि ष्जो लोग आज ज्ञानेश कुमार पर लोकसभा चुनाव में भाजपा को जिताने का बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं, उन्हें थोड़ा तो सामान्य ज्ञान होना चाहिए। ज्ञानेश कुमार फरवरी 2025 में चुनाव आयोग के शीर्ष पद पर आए, जबकि लोकसभा चुनाव 2024 में ही संपन्न हो चुके थे। जिस अधिकारी की उस समय पदस्थापना ही नहीं थी, उस पर आरोप लगाना कांग्रेस के मानसिक दिवालियापन को दर्शाता है। वहीं कांग्रेस के दोहरे रवैये को बेनकाब करते हुए कहा, अगर कांग्रेस को वास्तव में भारत के चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया पर कोई अविश्वास है, तो क्या वे यह मानेंगे कि राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी वाड्रा और तमिलनाडु व केरल के मुख्यमंत्री सब फर्जी तरीके से चुने गए हैं?