देहरादून। जैन समाज द्वारा गांधी रोड स्थित जैन भवन में विराजमान पूज्य आर्यिका 105 श्री पूर्णमति माताजी के मंगल सान्निध्य में चातुर्मास वर्षायोग के अंतर्गत कलश स्थापना से पूर्व मंगल कलश शुद्धि कार्यक्रम श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान जिनेंद्र के अभिषेक एवं शांतिधारा से हुआ। इसके पश्चात आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज की पूजन संपन्न हुई, जिसका सौभाग्य महिला जैन मिलन को प्राप्त हुआ।
अपने मंगल प्रवचन में पूज्य आर्यिका श्री पूर्णमति माताजी ने जैन आगम राजवार्तिक में वर्णित “सागर” काल की व्याख्या करते हुए बताया कि उसका माप अत्यंत विशाल एवं अकल्पनीय है। उन्होंने कहा कि एक महायोजन अर्थात दो हजार कोस लंबा, उतना ही चौड़ा और उतना ही गहरा गड्ढा सात दिन के मेढ़े के बालों से भरकर, उसे दबाने के बाद यदि प्रत्येक सौ वर्ष में केवल एक बाल निकाला जाए, तो जितने समय में वह गड्ढा खाली होगा, उसे व्यवहार पल्य कहा जाता है। असंख्यात व्यवहार पल्य का एक उद्धार पल्य, असंख्यात उद्धार पल्य का एक अद्धा पल्य तथा दस करोड़-कोड़ी अद्धा पल्य का एक सागर होता है। माताजी ने कहा कि ऐसे पाँच सौ सागर तक भोगे जाने वाले पाप भी जिनेंद्र भगवान की आराधना एवं णमोकार महामंत्र के श्रद्धापूर्वक स्मरण से नष्ट हो जाते हैं।
इसके उपरांत पूज्य माताजी के मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ मंगल कलशों की शुद्धि की प्रक्रिया संपन्न हुई। कार्यक्रम में विधानाचार्य द्वारा मंगलाष्टक, शुद्धि मंत्र एवं विशेष श्लोकों का उच्चारण किया गया। यजमानों ने संकल्प लेकर कलशों को सजाया तथा उनमें जल, हल्दी, सुपारी, पीली सरसों एवं श्रीफल स्थापित किए गए।
आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए मीडिया समन्वयक श्रीमती मधु जैन ने बताया कि 2 अगस्त (रविवार) प्रातः 8:30 बजे मंगल कलश स्थापना समारोह भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खंडूरी अति विशिष्ट अतिथि कैबिनेट मंत्री श्री खजान दास मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।