विरासत महोत्सव के भव्य मंच पर मास्टर शिल्पकारों के साथ आयोजित हुईं हस्तशिल्प कार्यशाला

देहरादून। विरासत में सुबह प्रथम सत्र के दौरान स्कूली बच्चों की क्राफ्ट वर्कशॉप का आयोजन किया गया, जिसमें कि भिन्न-भिन्न स्कूलों से आए हुनरमंद बच्चों ने नाना प्रकार की कलाकृतियां दिखाते हुए सभी को दांतो तले उंगलियां दबाने पर मजबूर कर दिया। विरासत के मंच पर बच्चों द्वारा की गई भिन्न-भिन्न प्रकार की बहुत ही आकर्षक कला कृतियां बहुत ही आकर्षक और भाव्यात्मक देखते ही प्रतीत हो रही थीं। विरासत महोत्सव-2026 के अंतर्गत मास्टर शिल्पकारों के साथ यह हस्तशिल्प कार्यशालाओं का आयोजन किया गया, जिनमें पाँच भिन्न-भिन्न स्कूलों के 80 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इन कार्यशालाओं का मुख्य उद्देश्य सभी प्रतिभागियों को पारंपरिक भारतीय कला और शिल्प से परिचित कराना तथा उन्हें विभिन्न हस्तशिल्प विधाओं को सीखने और आजमाने का अवसर प्रदान करना रहा।
कार्यशालाओं में ऐपन कला, सांझी कला, टेराकोटा, फूल बनाने की कला तथा टाई-एंड-डाई की विधाओं को शामिल किया गया। मास्टर शिल्पकारों के मार्गदर्शन में प्रतिभागियों ने इन पारंपरिक कलाओं की बारीकियों को समझा और रचनात्मक गतिविधियों में हिस्सा लिया। मुख्य बात यह है कि इन कार्यशालाओं ने प्रतिभागियों को भारतीय हस्तशिल्प परंपराओं से जुड़ने और अपनी कलात्मक प्रतिभाओं को निखारने का अवसर प्रदान किया और सभी का हौसला भी बढ़ाया।
विरासत महोत्सव-2026 निरंतर बेहतरीन और भव्य गीत- संगीतों से परिपूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां अपने शाही मेहमानों को देता चला आ रहा है। आज इसी क्रम में विरासत सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत कैंब्रियन हॉल के छात्र-छात्राओं द्वारा दी गई खूबसूरत सूफियाना संगीत की बहुत ही मधुर प्रस्तुति रही। कैम्ब्रियन हॉल के विद्यार्थियों ने इस सूफियाना संगीत की मनमोहक प्रस्तुति जैसे ही दी, तो विरासत की यह महफिल भर उठी और सभी झूमने लगे। इस केम्ब्रियन हॉल के 54 विद्यार्थियों ने प्रसिद्ध सूफी गायक नुसरत फतेह अली खान के लोकप्रिय गीत ‘साँसों की माला’ को सामूहिक रूप से प्रस्तुत किया।
विद्यार्थियों की प्रस्तुति ने दर्शकों को सूफियाना संगीत की भावपूर्ण धुनों से रूबरू कराया। इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने अपनी संगीत प्रतिभा और सामूहिक तालमेल का सुंदर प्रदर्शन किया। प्रस्तुति में शामिल विद्यार्थियों के नाम क्रमशः राशि चैहान, जरिया मॉरिस, निष्ठा कपूर, काव्या सिंह, प्रियंशी कौंडल, काव्या जटवानी, अदिति सेमवाल, अंशिका राणा, सांझ आहूजा, ओस आहूजा, परिशि गोयल, अनन्या जैन, अगम्या गुप्ता, अर्चिषा मोगा, मानसी ठाकुरी, शिवांगी श्रेष्ठा, जहीन हयात, आदर्श कुमार, देव खट्टक, मिद्दत रहमान, राशि थापा, पल पुंडीर, शौर्य वीर, रिद्धिम मेहरा, प्रियांशु मिश्रा, शिवांश डंगवाल, दर्श खट्टक, अदिति, आरना अरोड़ा, सुहाना, संस्कृति थापा, मान्यता, मीत रावत, आरोही भट्ट, रितिशा पंवार, रियांशी, तनिष्का थापा, आकांक्षा, विभूषा, अवंतिका, किंजल, शिखर, युवराज रस्तोगी, कार्तिक, अक्ष गुप्ता, आँचल, आराध्या, सौरव आहूजा, मदन चड्ढा और हिमांशु रहे।
विरासत महोत्सव 2026 में भरतनाट्यम, ओडिसी और कथक की एक सुंदर संयुक्त प्रस्तुति आयोजित की गई। संगीत निर्देशन और गायन की जिम्मेदारी सुधा रघुरामन ने निभाई। तीनों शास्त्रीय नृत्य शैलियों की प्रस्तुतियों ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य की विविधता और सौंदर्य को मंच पर साकार किया। भरतनाट्यम में आरोही मुंशी, ओडिसी में वाणी माधव और कथक में मौमाला नायक ने अपनी कला प्रस्तुत की। प्रस्तुति की शुरुआत नागेंद्र राग से हुई, जिसके बाद यमन और शिवरंजनी रागों में दो रचनाएँ झपताल में प्रस्तुत की गईं। वाद्य संगत में प्रफुल्ल कुमार मंगराज ने पखावज, एम. वी. चंद्रशेखर ने मृदंगम, अब्दुल रहमान ने तबला और जय रघुरामन ने बाँसुरी पर साथ दिया। संगीत और नृत्य के इस समन्वय ने दर्शकों को भारतीय शास्त्रीय कलाओं की समृद्ध परंपरा का अनुभव कराया।  तीनों की मनमोहक एवं मधुर बनी महफिल ने विरासत को अपनी आगोश में लिए रखा। आरोही मुंशी एक प्रतिष्ठित भारतीय शास्त्रीय भरतनाट्यम नृत्यांगना, कला क्यूरेटर और शिक्षिका हैं। मध्य प्रदेश के भोपाल से संबंध रखने वाली आरोही ने सदियों पुरानी परंपराओं और आधुनिक कलात्मक संवेदनाओं के समन्वय से अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। उन्होंने भोपाल स्थित यमन अकादमी ऑफ फाइन आर्ट्स में अपनी माता और प्रसिद्ध भरतनाट्यम नृत्यांगना डॉ. लता मुंशी से गुरु-शिष्य परंपरा के अंतर्गत कठोर प्रशिक्षण प्राप्त किया। उनके पास भरतनाट्यम में स्नातकोत्तर की उपाधि है और वे शास्त्रीय नृत्य में नए प्रयोगों के लिए जानी जाती हैं। उनके उल्लेखनीय प्रयोगों में प्रसिद्ध कलाकार सैयद हैदर रजा की अमूर्त आधुनिक चित्रकलाओं को भरतनाट्यम की मुद्राओं और गतियों में रूपांतरित करना शामिल है।