विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर आर्ट ऑफ लीविंग द्वारा मीडिया कर्मियों के लिए विशेष ध्यान सत्र किया गया आयोजित

देहरादून: विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर आर्ट ऑफ लिविंग, देहरादून द्वारा मीडिया कर्मियों के लिए एक घंटे के विशेष ध्यान एवं मानसिक स्वास्थ्य सत्र का यहां उत्तरांचल प्रेस क्लब में आयोजन किया गया।
उत्तरांचल प्रेस क्लब में आयोजित किए गए इस कार्यक्रम का उद्देश्य पत्रकारों और मीडिया कर्मियों को तनावमुक्त जीवन, मानसिक शांति तथा भावनात्मक संतुलन बनाए रखने में ध्यान और श्वास तकनीकों की भूमिका से परिचित कराना था। सत्र का संचालन आर्ट ऑफ लिविंग के उत्तराखंड प्रभारी एवं वरिष्ठ शिक्षक नितिन जैन ने किया। इस अवसर पर मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुए नितिन जैन, नंदिता सिंह, संजीव कुमार तथा आनन्द कंसल ने संयुक्त रूप से कहा कि ध्यान लगाने से आत्मिक एवं मानसिक शांति मिलती है I पत्रकार वार्ता में गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जी का संदेश भी साझा किया गया, जिसमें उन्होंने वर्तमान समय में मानसिक स्वास्थ्य की बढ़ती आवश्यकता और ध्यान के महत्व पर प्रकाश डाला। नितिन जैन ने कहा कि गुरुदेव के संदेश के अनुसार, आज की व्यस्त और अनिश्चितताओं से भरी जीवनशैली में ध्यान न तो फैशन है और न ही विलासिता, बल्कि समय की आवश्यकता है। सूचनाओं की निरंतर बढ़ती मात्रा, कार्य का दबाव, अकेलापन और तनाव व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में स्वयं से जुड़ने, मन को विधाम देने और आंतरिक शांति का अनुभव करने के लिए नियमित रूप से समय निकालना आवश्यक है। ध्यान व्यक्ति को अधिक शांत, सजग, एकाग्र और भावनात्मक रूप से संतुलित बनाने में सहायक हो सकता है। उन्होंने कहा कि गुरुदेव ने प्रतिदिन सुबह और शाम 15 से 20 मिनट ध्यान के लिए निकालने पर जोर देते हुए कहा कि जिस प्रकार हम शरीर की स्वच्छता का ध्यान रखते हैं, उसी प्रकार मन की शांति और स्वच्छता के लिए भी समय देना चाहिए। स्वस्थ मन अच्छी नींद, सकारात्मक दृष्टिकोण और जीवन की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। “मजबूत मन कमजोर शरीर को भी संभाल सकता है” गुरुदेव का यह प्रेरक संदेश मानसिक स्वास्थ्य और आंतरिक शक्ति के महत्व को रेखांकित करता है। सत्र में ध्यान को तनाव प्रबंधन, आंतरिक शांति और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के प्रभावी साधन के रूप में प्रस्तुत किया गया। उन्होंने सामूहिक ध्यान के माध्यम से समाज में शांति, सद्भाव और सकारात्मकता को बढ़ावा देने पर भी बल दिया। इस अवसर पर मीडिया कर्मियों को प्राणायाम, अनुलोम-विलोम सहित विभिन्न श्वास प्रक्रियाओं और ध्यान का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया। प्रतिभागियों को प्रेरित किया गया कि वे अपनी व्यस्त कार्यशैली के बीच मानसिक स्वास्थ्य के लिए समय निकालें और ध्यान को दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
पत्रकारों के लिए सुदर्शन क्रिया और अन्य तनाव मुक्ति कार्यक्रमों के विशेष शिविर आयोजित करने की दिशा में पहल करने की बात भी कही गई। आर्ट ऑफ लिविंग की यह पहल समाज के उस महत्वपूर्ण वर्ग तक ध्यान, योग और श्वास तकनीकों का लाभ पहुंचाने का प्रयास है, जो अपनी व्यस्त दिनचर्या और पेशेवर जिम्मेदारियों के बीच निरंतर मानसिक दबाव का सामना करता है। गुरुदेव के संदेश से प्रेरणा लेते हुए ध्यान के माध्यम से हिंसा-मुक्त समाज, रोग-मुक्त शरीर, चम-मुन्नत मन और दुख-मुक्त जीवन की दिशा में आगे बढ़ने का आहवान किया गया। इस अवसर पर आर्ट ऑफ लिविंग के मीडिया कोऑर्डिनेटर संजय भार्गव, स्टेट कोऑर्डिनेटर नंदिता सिंह, मीडिया कोऑर्डिनेटर नितिन जैन, स्टेट एपेक्स के सदस्य आनंद कंसल के अलावा ललित मोहन और ऋषभ कोहली भी मौजूद रहे।