भिकियासैंण के पास कार खाई में गिरने से तीन लोगों की मौत

देहरादून। अल्मोड़ा जिले के भिकियासैंण तहसील क्षेत्र में गुरुवार तड़के एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। सड़क हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई। हादसा रापड़-गंगोड़ा-चमड़खान मोटर मार्ग पर हुआ। यहां एक कार अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे गहरी खाई में जा गिरी। दुर्घटना की सूचना मिलते ही एसडीआरएफ और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया।
राज्य आपदा केन्द्र से मिली जानकारी के अनुसार कार संख्या यूके 04 टी 6683 सुबह करीब साढ़े चार बजे दुर्घटनाग्रस्त हुई। बताया जा रहा है कि वाहन में तीन लोग सवार थे, जो नौघरिया (सिनौड़ा) क्षेत्र से जागर कार्यक्रम में शामिल होकर वापस चमड़खान (तहसील रानीखेत) लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में वाहन चालक नियंत्रण खो बैठा और कार सड़क से नीचे जा गिरी।
दुर्घटना की सूचना मिलते ही तहसील मुख्यालय भिकियासैंण से तहसीलदार बर्खा जलाल के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम तथा एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। एसडीआरएफटीम ने कठिन परिस्थितियों में रेस्क्यू अभियान चलाकर वाहन में फंसे तीनों लोगों को बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
एसडीआरएफ टीम प्रभारी महिपाल सिंह ने बताया कि रेस्क्यू अभियान के बाद तीनों शवों को कब्जे में लेकर वैधानिक कार्रवाई के लिए पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है। हादसे की सूचना मिलने पर थानाध्यक्ष भतरौंजखान अवनीश कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम भी मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी गई है। रेस्क्यू अभियान में एसडीआरएफ प्रभारी महिपाल सिंह, कांस्टेबल हरीश पांडेय, अमित, राजेंद्र, जगमोहन, आनंद तथा होमगार्ड रोहित शामिल रहे।
मृतकों में भुवन पुत्र दीवान राम निवासी ग्राम सनेटी तहसील रानीखेत, कैलाश चंद्र पुत्र बहादुर राम निवासी ग्राम दौड़ाखाल तहसील रानीखेत उम्र 32 वर्ष की पहचान हुई है। तीसरे मृतक की शिनाख्त के प्रयास किए जा रहे हैं। बताया गया कि तीनों व्यक्ति जागरी का कार्य करते थे, जो रात्रि में ग्राम चमोली पुसैला में जागर लगाकर वापस अपने घर जा रहे थे।
उत्तराखंड में जगरी बहुत सम्मानित लोग होते हैं। जगरी यहां के पारंपरिक लोक गायक होते हैं। ये विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान भी संपन्न कराते हैं। स्थानीय देवी-देवताओं की जागर जगरिए ही संपन्न करवाते हैं। जागर उत्तराखंड में धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। जगरी हुड़के की थाप पर देवी-देवताओं की स्तुति करके उन्हें जागृत करते हैं। अक्सर लोग गर्मी की छुट्टियों में मैदानी इलाकों से घर लौटते हैं और जागर लगाते हैं। तब जगरियों को जागर लगाने के लिए आमंत्रित किया जाता है।