नवोदय विद्यालय के पूर्व छात्रों ने पेश की संवेदना और दोस्ती की मिसाल

रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के जवाहर नवोदय विद्यालयों के पूर्व छात्रों के संगठन उत्तराखंड जवाहर नवोदय विद्यालय एलुमनाई एसोसिएशन ने सामाजिक सरोकार, मानवीय संवेदना और आजीवन मित्रता का एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। संगठन ने जवाहर नवोदय विद्यालय, रुद्रप्रयाग के दिवंगत पूर्व छात्र स्व. उपेंद्र रावत की आकस्मिक मृत्यु के पश्चात उनके परिवार को न केवल आर्थिक सहायता प्रदान की, बल्कि उनके भविष्य को सुरक्षित करने की ठोस जिम्मेदारी भी अपने कंधों पर ली है।
गौरतलब है कि बणसू, जाखधार निवासी स्व. उपेंद्र रावत की असामयिक मृत्यु से उनका परिवार गहरे आर्थिक और मानसिक संकट में आ गया था। इस कठिन समय में न्ज्ञश्रछ।। के पूर्व छात्रों ने आपसी सहयोग से दो लाख 27 हजार की धनराशि एकत्रित कर परिवार को चेक के माध्यम से सौंपी, जिससे परिवार को तत्काल राहत मिल सके। इस अवसर पर एसोसिएशन के मीडिया प्रभारी विक्रम सिंह, नवल किशोर जगवान, सतवीर, नवप्रभात उपेंद्र के परिवार से मिलने पहुंचे थे।
संगठन द्वारा केवल एकमुश्त आर्थिक सहायता तक ही सीमित न रहते हुए यह निर्णय भी लिया गया कि स्व. उपेंद्र रावत के दोनों बच्चों की कक्षा 12वीं तक की शिक्षा का पूरा खर्च तथा उनकी छोटी बहन की पढ़ाई की जिम्मेदारी पूर्व छात्र स्वयं वहन करेंगे, ताकि परिवार के बच्चों की शिक्षा किसी भी परिस्थिति में बाधित न हो।
इसके अतिरिक्त एसोसिएशन ने दिवंगत उपेंद्र रावत की पत्नी एवं उनके भाई के लिए उपयुक्त रोजगार की व्यवस्था कराने का भी आश्वासन दिया है, जिससे परिवार आत्मनिर्भर बन सके। संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में किसी भी प्रकार की आवश्यकता पड़ने पर परिवार को हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी।
इस अवसर पर अध्यक्ष सत्यदीप शाह’ ने कहा नवोदय विद्यालय हमें केवल शिक्षा ही नहीं देता, बल्कि जीवन भर निभने वाले रिश्ते और जिम्मेदारी का भाव भी सिखाता है। उपेंद्र हमारे साथी, हमारे भाई थे। उनके असमय जाने के बाद उनके परिवार को अकेला छोड़ देना नवोदय संस्कारों के खिलाफ है। संगठन यह सुनिश्चित करेगा कि उनके बच्चों की शिक्षा, परिवार की आजीविका और भविष्य सुरक्षित रहे। वहीं महासचिव अंचला असवाल’ ने कहा यह सहयोग केवल आर्थिक मदद नहीं है, बल्कि एक परिवार द्वारा दूसरे परिवार का हाथ थामने का भाव है। नवोदय के पूर्व छात्र संकट की घड़ी में एक-दूसरे के साथ खड़े रहते हैं। स्व. उपेंद्र रावत के परिवार को यह भरोसा दिलाया गया है कि वे कभी अकेले नहीं हैं।